प्रकाश रसायन का परिचय ( Introduction of Photochemistry )

परिचय (Introduction) :- रासायनिक अभिक्रिया में अणु की प्रकृति (Identity) बंध के टूटने से व बनने से बदलती है। साधारणता रासायनिक अभिक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा बाह्य स्रोत से दी जाती है इस ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा (Thermal energy ) कहते हैं तथा इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं को ऊष्मा अभिक्रिया (Thermal or Dark Reactions) कहते है। लेकिन कुछ अभिक्रियाएँ प्रकाश की उपस्थिति में होती है अर्थात् वे प्रकाश ऊर्जा ग्रहण करती है अर्थात् ये अभिक्रियाएं प्रकाश ऊर्जा के ग्रहण या अवशोषण के बिना प्रारम्भ नहीं हो सकती उनको प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया (Photo chemical reactions) कहते हैं ।

अत: रसायन में अणु द्वारा उचित विकिरणों के अवशोषण से अणु के भौतिक या रासायनिक परिवर्तन के अध्ययन को प्रकाश रसायन कहते हैं ।
सामान्यतः इसमें वे सभी विकिरण जो रेडियो तरंग से γ-किरण के बीच के होते हैं उनका अध्ययन करते हैं। लेकिन विशेष रूप से प्रकाश के अवरक्त, पराबैंगनी व दृश्य प्रकाश के विकिरण के अवशोषण द्वारा जो परिवर्तन होते हैं उनका अर्थात् 102nm से 103 nm या 200 nm से 800 nm (2000 Å से 8000 Å), (35-75 किलो कैलोरी) के मध्य अवशोषण से जो परिवर्तन होते हैं उनका अध्ययन करते हैं।
अतः वे रासायनिक परिवर्तन जो प्रकाश के 200 nm से 800 nm के मध्य विकिरणों के अवशोषण से होते हैं उन्हें प्रकाश रसायन कहते हैं तथा प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाएँ वे हैं जो प्रकाश विकिरणों के फोटानों के अवशोषण के फलस्वरूप घटित होती हैं । सामान्यतः 200 nm से 800 nm के मध्य की ऊर्जा अणु के इलेक्ट्रॉनों के उत्तेजन के लिए उपयुक्त है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सके ।
इस प्रकार प्रकाश रसायन रसायन शास्त्र की वह शाखा है जिसमें प्रकाश विकिरणों फोटोन (photon) के अवशोषण फोटोन (photon) से प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाओं की दर, क्रियाविधि आदि का अध्ययन किया जाता है ।
उच्च ऊर्जा विकिरणों x-किरण, γ-किरण, आदि द्वारा सम्पन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के अध्ययन को विकिरण रसायन (radiation chemistry) कहा जाता है ।
प्रकाश विकिरणों से कई प्रकार की अभिक्रियाएं जैसे संश्लेषण, बहुलीकरण, आइसोमेटिक परिवर्तन, ऑक्सीकरण, अपचयन आदि सम्पन्न होती हैं ।
आज के वैज्ञानिक एवं तकनीक युग में प्रकाश रसायन का महत्व एवं उपयोग बहुत अधिक है जैसे फोटो वोल्टिक सैलों द्वारा वैद्युत उत्पादन, जल का शुद्धीकरण, विटामीन D, का संश्लेषण, कीटनाशकों का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण, सौर ऊर्जा संरक्षण तथा मानव जीवन के लिए उपयोगी पदार्थों के निर्माण में प्रकाश रसायन की अहम् भूमिका है ।
इन अभिक्रियाओं द्वारा उत्पन्न उत्पाद मानव उपयोगी के साथ पर्यावरण को भी प्रदूषित नहीं करता है तथा अभिक्रिया के लिए ऊर्जा का खर्च भी बहुत कम होता है ।


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