पारिस्थितिक स्तूप व खाद्य श्रृंखला

पारिस्थितिक स्तूप

► पारिस्थितिक स्तूप की अवधारणा चार्ल्स एल्टन ने दी थी इसमें कई स्तर होते हैं ऊपरी स्तर उपभोक्ता होता है निचला उत्पादक स्तर होता है ।

पारिस्थितिक स्तूप तीन प्रकार के होते हैं -
संख्या का स्तूप :- इसमें वृक्ष का स्तूप उल्टा होता है बाकी सभी स्तूप सीधे होते हैं ।
ऊर्जा का स्तूप :- इसमें पिरामिड सदैव सीधे होता है ।
जैवभार का स्तूप :- इसमें जल तंत्र व स्थल तंत्र का स्तूप आता है इसमें जल तंत्र का स्तूप उल्टा होता है व स्थल का स्तूप सीधा होता है ।

खाद्य श्रृंखला :-

► खाद्य श्रृंखला को कई प्रकार के जीव मिलकर बनाते हैं इसमें परभक्षी , परजीवी , मृतोपजीवी जीव होते हैं ।

परभक्षी ( Predator ) :-

► यह छोटे जीवन से प्रारंभ होकर बड़े जीवो पर खत्म होती है ।

परजीवी ( Parasite ) :-

► यह बड़े जीवो से प्रारंभ होकर छोटे जीवो पर खत्म होती है ।

मृतोपजीवी ( Saprophytic ) :-

► यह मृत जीवो से प्रारंभ होकर सूक्ष्मजीवों की ओर जाती है ।

उदाहरण :-
घास हिरण शेर जू
परभक्षी परजीवी मृतोपजीवी सूक्ष्मजीव

घास → कीट → मेंढक → सांप → मोर/बाज

पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य कड़ी जितनी लंबी होती है उतनी ही अधिक ऊर्जा का रूपांतरण होता है हर स्तर पर 10 % ऊर्जा का हास हो जाता है ।


Note :-पारिस्थितिक तंत्र


सहजीविता ( Symbiosis ) :-

► दो जीवो के बीच ऐसा पारस्परिक संबंध जिसके द्वारा दोनों पौधों को लाभ होता है इसे सहजीवीता कहते हैं
उदाहरण :- लाइकेन में शैवाल व कवक का संबंध लेग्युमिनोसी कुल के पौधों में बैक्टीरिया का वास ।

सहजीविता चार प्रकार की होती है -

1. सहोपकारिता ( Mutalism ) :-

► इस प्रकार की सहजीविता में दोनों जीवो को लाभ होता है
उदाहरण :- लाइकेन , मवेशिया की आंत में E-coli जीवाणु ।

2. सहभोजिता ( Commensation ) :-

► इस प्रकार की सहजीविता में एक जीव को लाभ होता है वह दूसरे जीव को लाभ हो भी सकता है या नहीं।
उदाहरण :- आर्किड पादप का आम पर लाया जाना , भैंस पर बगुला ।

3. परजीविता ( Parasitism ) :-

► इस प्रकार की सहजीविता में एक जीव को फायदा होता है वह दूसरे जीव को हानि होती है
उदाहरण - बालों में जू , आंत्र में एस्केरिस ।

4. प्रतिस्पर्धा ( Competition ) :-

► इस सहजीविता में किसी को भी लाभ नहीं होता है अर्थात दोनों को ही हानि होती है ।


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