अवकलन के सूत्र तथा सीमा एवं सांतत्य की परिभाषा,सूत्र एवं प्रमेय | PDF Download |

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avkalan(Differentiation/Derivatives) ke sutra tatha sima,saantaty(Limits and Continuity) ki paribhasha,sutra evm pramey

अवकलन के सभी सूत्र ( Differentiation/Derivatives All sutra):-

d / d𝓍
(K) = 0, (K अचर है )

d / d𝓍
[
1 / 𝓍
] =
-1 / 𝓍2

d / d𝓍
|𝓍| =
|𝓍| / 𝓍

d / d𝓍
[
𝓍n+1 / n+1
] = 𝓍n, n ≠ -1

d / d𝓍
K.ƒ(𝓍) = K
d / d𝓍
ƒ(𝓍) ( जहाँ K अचर है )

d 𝓍 n / d𝓍
= n 𝓍 n-1

d (Sin𝓍) / d𝓍
= Cos𝓍

d (Cos𝓍) / d𝓍
= - Sin𝓍

d (Tan𝓍) / d𝓍
= Sec 2𝓍

d (Cot𝓍) / d𝓍
= - Cosec 2𝓍

d (Sec𝓍) / d𝓍
= Sec𝓍 ∙ Tan𝓍

d (Cosec𝓍) / d𝓍
= - Cosec𝓍 ∙ Cot𝓍

d (Sin h𝓍) / d𝓍
= Cos h𝓍

d (Cos h𝓍) / d𝓍
= Sin h𝓍

d (Tan h𝓍) / d𝓍
= Sec h2𝓍

d (Cot h𝓍) / d𝓍
= -Cosec h2𝓍

d (Sec h𝓍) / d𝓍
= -Sec h𝓍 ∙ Tan h𝓍

d (Cosec h𝓍) / d𝓍
= - Cosec h𝓍 ∙ Cot h𝓍

d (Sin - 1𝓍) / d𝓍
=
1 / 1 - 𝓍 2

d (Cos - 1𝓍) / d𝓍
=
- 1 / 1 - 𝓍 2

d (Tan - 1𝓍) / d𝓍
=
1 / 1 + 𝓍 2

d (Cot - 1𝓍) / d𝓍
=
- 1 / 1 + 𝓍 2

d (Sec - 1𝓍) / d𝓍
=
1 / 𝓍𝓍 2 - 1

d (Cosec - 1𝓍) / d𝓍
=
- 1 / 𝓍𝓍 2 - 1

d e 𝓍 / d𝓍
= e 𝓍

d e - 𝓍 / d𝓍
= - e -𝓍

d log 𝓍 / d𝓍
=
1 / 𝓍

d a 𝓍 / d𝓍
= a 𝓍 log𝓍

d 𝓍 / d𝓍
=
1 / 2 𝓍

d / d𝓍
Sin - 1(
𝓍 / a
)=
1 / a2 - 𝓍 2

d / d𝓍
Cos - 1(
𝓍 / a
) =
- 1 / a2 - 𝓍 2

d / d𝓍
Tan - 1(
𝓍 / a
) =
a / a2 + 𝓍 2

d / d𝓍
Cot - 1(
𝓍 / a
) =
- a / a2 + 𝓍 2

d / d𝓍
Sec - 1(
𝓍 / a
) =
a / 𝓍𝓍 2 - a2

d / d𝓍
Cosec - 1(
𝓍 / a
) =
- a / 𝓍𝓍 2 - a2

d / d𝓍
[ ƒ(𝓍) + g(𝓍) ] =
d / d𝓍
ƒ(𝓍) +
d / d𝓍
g(𝓍)

d / d𝓍
[ ƒ(𝓍) - g(𝓍) ] =
d / d𝓍
ƒ(𝓍) -
d / d𝓍
g(𝓍)

d / d𝓍
[ ƒ(𝓍) + g(𝓍) + v(𝓍) ] =
d / d𝓍
ƒ(𝓍) +
d / d𝓍
g(𝓍) +
d / d𝓍
v(𝓍)

d / d𝓍
[ ƒ(𝓍) ∙ g(𝓍) ] = ƒ(𝓍)
d / d𝓍
g(𝓍) + g(𝓍)
d / d𝓍
ƒ(𝓍)

दो फलनों के भागफल का अवकलज =
हर x (अंश का अवकलज) - अंश x (हर का अवकलज) / हर2
d / d𝓍
[
ƒ(𝓍) / g(𝓍)
] =
g(𝓍) ∙ d ƒ(𝓍) /d𝓍 - ƒ(𝓍) ∙ d g(𝓍) /d𝓍 / [g(𝓍)]2

यदि y = uv
तब
dy / d𝓍
= uv[
v / u
du / d𝓍
+ (log u)
dv / d𝓍
]

यदि 𝓍 = ƒ(t) , y = Φ(t) हो तो हम प्राचल को बिना विलोपित किए ,
dy / d𝓍
का मान निम्न सूत्र से ज्ञात कर सकते है
dy / d𝓍
=
dy / dt / d𝓍 / dt
=
प्राचल t के सापेक्ष y का अवकलज / प्राचल t के सापेक्ष 𝓍 का अवकलज

यदि y = ƒ(u), u = Φ(v) , v = Ψ(w) तथा w = F(𝓍)
dy / d𝓍
=
dy / du
.
du / dv
.
dv / dw
.
dw / d𝓍

सीमा (Limits)

फलन की सीमा की परिभाषा ( Definition of limit of a function ) :-

माना फलन y = ƒ(𝓍) , 𝓍 = a पर अपरिभाषित या परिभाषित है लेकिन 𝓍 = a के दायें तथा बायें परिवेश में फलन ƒ(𝓍) परिभाषित है , तो वास्तविक संख्या ℓ फलन ƒ की सीमा कहलाती है जब 𝓍 का मान a की ओर बढता हो यदि केवल और केवल यदि स्वेच्छ धनात्मक संख्या ∈ के लिए धनात्मक संख्या δ का अस्तित्व इस प्रकार हो कि
| ƒ(𝓍) - ℓ | < ∈ जबकि 0 < | 𝓍 - a| < δ इसे संकेत रूप में निम्न प्रकार लिख सकते है -

lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) = ℓ

दायीं सीमा (Right hand limit) :-

यदि 𝓍 दायीं ओर से a की ओर बढ़ता है तो ƒ की दायीं सीमा को निम्न प्रकार लिखते है

lim𝓍 → a+
ƒ(𝓍) अथवा ƒ(a + 0)
दायीं सीमा ज्ञात करने के लिये हम फलन ƒ(𝓍) में 𝓍 = a + h रखकर h → 0 करते है अत: ƒ(a + 0) =
limh → 0
ƒ(a + h) , (h > 0)

बायीं सीमा (Left hand limit) :-

यदि 𝓍 बायीं ओर से a की ओर बढ़ता है तो ƒ की बायीं सीमा को निम्न प्रकार लिखते है

lim𝓍 → a-
ƒ(𝓍) अथवा ƒ(a - 0)
बायीं सीमा ज्ञात करने के लिये हम फलन ƒ(𝓍) में 𝓍 = a - h रखकर h → 0 करते है अत: ƒ(a - 0) =
limh → 0
ƒ(a - h) , (h > 0)

सीमा का अस्तित्त्व (Existence of limit) :-

lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) का अस्तित्त्व होता है यदि और केवल यदि बायीं सीमा अर्थात्
lim𝓍 → a-
ƒ(𝓍) और दायीं सीमा अर्थात्
lim𝓍 → a+
ƒ(𝓍) दोनों का अस्तित्त्व हो और ये दोनों बराबर हों अर्थात्
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) का अस्तित्त्व होगा - ƒ(a - 0) = ƒ(a + 0) यदि किसी फलन की किसी बिंदु पर सीमा का अस्तित्त्व हो तो दोनों ओर की सीमा निकालने की आवश्यकता नहीं होती , एक ओर की सीमा निकालने ही काफी है

सीमाओ पर प्रमेय ( Theorems on limits ) :-

माना ƒ व g दो वास्तविक फलन है जिनका प्रान्त D है तब नये फलन ƒ + g , ƒg,
ƒ / g
g ≠ 0 का प्रान्त भी D ही होगा
साथ ही + g)(𝓍) = ƒ(𝓍) + g(𝓍) (ƒg)(𝓍) = ƒ(𝓍)∙g(𝓍)
[
ƒ / g
](𝓍) =
ƒ(𝓍) / g(𝓍)
, g(𝓍) ≠ 0
माना
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) = ℓ और
lim𝓍 → a
g(𝓍) = m यदि ℓ एवं m विधमान है तो

योग और अंतर नियम :-

lim𝓍 → a
+ g) =
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) +
lim𝓍 → a
g(𝓍) = ℓ + m

गुणन नियम :-

lim𝓍 → a
(ƒg)(𝓍) =
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) ∙
lim𝓍 → a
g(𝓍) = ℓ∙m

भिन्न नियम :-

lim𝓍 → a
[
ƒ / g
](𝓍) =
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍)
/
lim𝓍 → a
g(𝓍)
=
/ m
; m ≠ 0

अचर नियम :-

यदि ƒ(𝓍) = k , जहाँ k अचर है
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) =
lim𝓍 → a
k = k

अचर गुणन नियम :-

lim𝓍 → a
kƒ(𝓍) = k
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) = k∙ℓ जहाँ k अचर है

मापांक नियम :-

lim𝓍 → a
|ƒ(𝓍)| = |
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍)| = |ℓ|

घात नियम :-

lim𝓍 → a
[{ƒ(𝓍)}g(𝓍)] = {
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) }
lim𝓍 → a
g(𝓍)
= ℓm

विशेष स्थिति में :

(a)
lim𝓍 → a
logƒ(𝓍) = log{
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) } = log ℓ

(b)
lim𝓍 → a
eƒ(𝓍) = e
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍)
= e

(c)
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) = +∞ या -∞ तब
lim𝓍 → a
1 / ƒ(𝓍)
= 0

कुछ मानक सीमाएँ (Some standard limits) :-

1. यदि ƒ(𝓍) → 0 , जब 𝓍 → 0 तब

limƒ(𝓍) → 0
Sin ƒ(𝓍) / ƒ(𝓍)
= 1

limƒ(𝓍) → 0
Cos ƒ(𝓍) = 1

limƒ(𝓍) → 0
Tan ƒ(𝓍) / ƒ(𝓍)
= 1

limƒ(𝓍) → 0
e ƒ(𝓍) - 1 / ƒ(𝓍)
= 1

limƒ(𝓍) → 0
b ƒ(𝓍) - 1 / ƒ(𝓍)
= logeb (b ≠ 0)

limƒ(𝓍) → 0
loge [ 1 + ƒ(𝓍) ] / ƒ(𝓍)
= 1

limƒ(𝓍) → 0
[ 1 + ƒ(𝓍) ]1/ƒ(𝓍) = e

limƒ(𝓍) → 0
ƒ(𝓍) = A तथा
limƒ(𝓍) → 0
Φ(𝓍) = B
तब
limƒ(𝓍) → 0
[ƒ(𝓍)]Φ(𝓍) = AB

2. दिये हुए परिणामों से -

lim𝓍 → 0
Sin 𝓍 / 𝓍
= 1

lim𝓍 → 0
Cos 𝓍 = 1

lim𝓍 → 0
Tan 𝓍 / 𝓍
= 1

lim𝓍 → 0
e𝓍 - 1 / 𝓍
= 1

lim𝓍 → 0
b𝓍 - 1 / 𝓍
= logeb (b ≠ 0)

lim𝓍 → 0
loge[ 1 + 𝓍 ] / 𝓍
= 1

lim𝓍 → 0
[ 1 + 𝓍 ]1/𝓍 = e

lim𝓍 → ∞
[ 1 +
1 / 𝓍
]𝓍 = e

lim𝓍 → a
𝓍m - am / 𝓍 - a
= mam-1

lim𝓍 → 0
𝓍m - am / 𝓍n - an
=
m / n
am-n

प्रसार विधि ( Expansion method) :

यदि 𝓍 → 0 हो और व्यंजक में कम से कम एक प्रसार करने योग्य फलन हो तो उस फलन का प्रसार लिख कर व्यंजक को 𝓍 की बढती घातों में लिखते है इसके बाद अंश व हर में 𝓍 की उभयनिष्ठ घात का भाग देकर अनिर्धार्य रूप समाप्त करते है

कुछ मानक फलनों के प्रसार निम्न है :

e𝓍 = 1 + 𝓍 +
𝓍 2 / 2!
+
𝓍 3 / 3!
+ ....

e-𝓍 = 1 - 𝓍 +
𝓍 2 / 2!
-
𝓍 3 / 3!
+ ....

a𝓍 = 1 + (𝓍logea ) +
(𝓍logea )2 / 2!
+
(𝓍logea )3 / 3!
+ ....

loge(1 + 𝓍 ) = 𝓍 -
𝓍 2 / 2
+
𝓍3 / 3
- ....

loge(1 - 𝓍 ) = - 𝓍 -
𝓍 2 / 2
-
𝓍3 / 3
- ....

Sin 𝓍 = 𝓍 -
𝓍 3 / 3!
+
𝓍5 / 5!
- ....

Cos 𝓍 = 1 -
𝓍 2 / 2!
+
𝓍4 / 4!
- ....

tan 𝓍 = 𝓍 +
𝓍 3 / 3
+
2𝓍5 / 15
+ ....

Sin h𝓍 = 𝓍 +
𝓍 3 / 3!
+
𝓍5 / 5!
- ....

Cos h𝓍 = 1 +
𝓍 2 / 2!
+
𝓍4 / 4!
- ....

tan h𝓍 = 𝓍 -
𝓍 3 / 3
+
2𝓍5 / 15
- ....

(1 ± 𝓍 )n = 1 ± n𝓍 +
n(n-1) / 2!
𝓍2 ± ....

( 1 +
1 / 𝓍
)𝓍 = e ( 1 +
𝓍 / 2
+
11 / 24
𝓍2 + ...... )

Σn = 1 + 2 + 3 + .... + n = n
(n+1) / 2

Σn2 = 12 + 22 + 32 + .... + n2 = n
(n+1)(2n+1) / 6

Σn3 = 13 + 23 + 33 + .... + n3 = n
{n (n+1)}2 / 4

सांतत्य (Continuity) :-

फलन का एक बिंदु पर सांतत्य ( Continuity at a point ) :-

फलन ƒ(𝓍) अपने प्रान्त के किसी एक बिंदु 𝓍 = a पर संतत कहलाता है
यदि
lim𝓍 → a
ƒ(𝓍) = ƒ(a) विधमान हो अर्थात् यदि
lim𝓍 → a - 0
ƒ(𝓍) =
lim𝓍 → a + 0
ƒ(𝓍) = ƒ(a)
अर्थात् यदि ƒ(a - 0) = ƒ(a + 0) = ƒ(a)
अर्थात् यदि a पर फलन की बायीं सीमा = a पर फलन की दायीं सीमा = a पर फलन का मान

अन्तराल में फलन का सांतत्य ( Continuity in an Interval ) :-

खुला अन्तराल :

एक फलन ƒ(𝓍) खुले अन्तराल (a,b) में संतत होगा यदि वह अन्तराल (a,b) के प्रत्येक बिंदु पर संतत हो

बंद अन्तराल :

एक फलन ƒ(𝓍) बंद अन्तराल [a,b] में संतत कहलाता है यदि वह
1. (a,b) में संतत हो
2. 𝓍 = a पर दायीं ओर से संतत हो
3. 𝓍 = b पर बायीं ओर से संतत हो


संतत फलन ( Continuous function )

यदि कोई फलन अपने प्रान्त के प्रत्येक बिंदु पर संतत है तो उसे संतत फलन कहते है

कुछ संतत फलनों के उदाहरण :

1. तत्समक फलन : ƒ(𝓍) = 𝓍
2. अचर फलन : ƒ(𝓍) = c
3. बहुपद फलन : ƒ(𝓍) = a0𝓍n + a1𝓍n-1 + a2𝓍n-2 + a3𝓍n-3+ ........ + an
4. त्रिकोणमितीय फलन : ƒ(𝓍) = sin 𝓍 , cos 𝓍
5. चरघातांकी फलन : ƒ(𝓍) = a𝓍 , a > 0
6. लघुगणकीय फलन : ƒ(𝓍) = loge 𝓍
7. अतिपरवलय फलन : ƒ(𝓍) = sinh 𝓍 , cosh 𝓍 , tanh 𝓍
8. निरपेक्षमान फलन : ƒ(𝓍) = |𝓍| , 𝓍 + |𝓍| , 𝓍 - |𝓍| , 𝓍|𝓍|

संतत फलन के गुणधर्म ( Properties of continuous functions ) :-

यदि ƒ(𝓍) तथा g(𝓍) दो संतत फलन है तो
(a) 1. ƒ(𝓍) + g(𝓍) 2. ƒ(𝓍) - g(𝓍) 3. ƒ(𝓍) . g(𝓍) 4. cƒ(𝓍) जहाँ c अचर फलन है
भी संतत फलन होंगे

(b) यदि ƒ(𝓍) तथा g(𝓍) दो संतत फलन है तो
ƒ(𝓍) / g(𝓍)
उन बिन्दुओ पर संतत होगा जिन पर g(𝓍) ≠ 0
(c) यदि ƒ(𝓍) तथा g(𝓍) दो संतत फलन है तो उनका फलन (goƒ)(𝓍) भी संतत फलन होगा

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