परिमेय संख्या ( Rational Number )

परिमेय संख्या ( Rational Number )

परिमेय संख्या ( Rational Number ) की परिभाषा :-

वह संख्या जिसे p/q के रूप में लिखा जा सकें , जहाँ p तथा q पूर्णांक हो तथा q ≠ 0 हो उसे परिमेय संख्या कहते है p को अंश तथा q को हर कहा जाता है

उदाहरण :-
2 / 3
,
- 2 / 3
,
6 / 7
,
9 / -5

परिमेय संख्याओ से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य :-

1. परिमेय संख्याएँ योग व्यकलन और गुणन की संक्रियाओ के अंतर्गत संवृत है

2. परिमेय संख्याओ के लिए योग और गुणन की संक्रियाएं 1. क्रमविनिमेय है 2. साहचर्य है

3. परिमेय संख्याओ के लिए परिमेय संख्या शून्य योज्य तत्समक है

4. परिमेय संख्याओ के लिए परिमेय संख्या 1 गुणात्मक तत्समक है

5. परिमेय संख्या
a / b
का योज्य प्रतिलोम -
a / b
है और विलोमत: भी सत्य है
6. यदि
a / b
x
c / d
= 1 तो परिमेय संख्या
a / b
का व्युत्क्रम अथवा गुणात्मक प्रतिलोम
c / d
है

7. परिमेय संख्याओ को वितरकता : परिमेय संख्याएँ a , b और c के लिए
a(b+c) = ab + ac और a(b-c) = ab - ac

8. परिमेय संख्याओ को संख्या रेखा पर निरुपित किया जा सकता है

9. दी हुई दो परिमेय संख्याओ के मध्य अपरिमित परिमेय संख्याएँ होती है दो परिमेय संख्याओ के मध्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने में माध्य को अवधारणा सहायक है

10. शून्य एक परिमेय संख्या है

11. शून्य का कोई व्युत्क्रम नही होता है

12. दो परिमेय संख्याओ a तथा b के बीच की परिमेय संख्या
a + b / 2
होगी

13. सभी प्राकृतिक संख्याएँ , परिमेय संख्याएँ होती है

14. सभी पूर्ण संख्याएँ , परिमेय संख्याएँ होती है

15. सभी भिन्न परिमेय संख्याएँ होती है

16. जब दो परिमेय संख्याएँ संख्यात्मक मान में बराबर हो तो उन्हें परस्पर समतुल्य परिमेय संख्या कहा जाता है

जैसे :-
1 / 4
तथा
2 / 8
;
3 / 5
तथा
6 / 10

17. वे परिमेय संख्याएँ जिनके अंश तथा हर दोनों के संख्यात्मक मान धनात्मक हो , उन्हें धनात्मक परिमेय संख्या कहते है

जैसे :-
7 / 12
,
5 / 9
,
4 / 7
आदि

18. वे परिमेय संख्याएँ जिनके अंश तथा हर में से कोई एक का संख्यात्मक मान ऋणात्मक हो , उन्हें ऋणात्मक परिमेय संख्या कहते है

जैसे :-
-7 / 12
,
5 / -9
,
4 / 7
,
4 / -7
आदि

19. परिमेय संख्याएँ 1 तथा -1 का व्युत्क्रम भी क्रमश: 1 तथा -1 ही होता है

परिमेय संख्याओ के गुणधर्म :-

(A) परिमेय संख्याओ के लिए क्रम विनिमय नियम का सत्यापन :-

1. परिमेय संख्याओ का योग :-

दो परिमेय संख्याओ को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है अर्थात् परिमेय संख्याओ के लिए योग क्रम विनिमेय है
अत: किन्ही दो परिमेय संख्याओ a तथा b के लिए -
a + b = b + a ( यह योग के लिए क्रमविनिमेय नियम है )

उदाहरण के तौर पर :-
-2 / 3
+
5 / 7
=
5 / 7
+ (
-2 / 3
)
-2(7) + 5(3) / 21
=
5(3) + (-2)3 / 21
-14 + 15 / 21
=
15 - 14 / 21
1 / 21
=
1 / 21

2. परिमेय संख्याओ का व्यकलन ( घटाना ) :-

परिमेय संख्याओ को किसी भी क्रम में घटाया नही जा सकता है अर्थात् परिमेय संख्याओ के लिए व्यकलन क्रम विनिमेय नहीं है
अत: किन्ही दो परिमेय संख्याओ a तथा b के लिए
a - b ≠ b - a

उदाहरण के तौर पर :-
2 / 3
-
5 / 4
5 / 4
-
2 / 3
2(4) - 5(3) / 12
5(3) - 2(4) / 12
8 - 15 / 12
15 - 8 / 12
-7 / 12
7 / 12

3. परिमेय संख्याओ का गुणन :-

परिमेय संख्याओ को किसी भी क्रम में गुणा किया जा सकता है अर्थात् परिमेय संख्याओ के लिए गुणन क्रम विनिमेय है
अत: किन्ही दो परिमेय संख्याओ a तथा b के लिए
a x b = b x a

उदाहरण के तौर पर :-
2 / 3
x
5 / 4
=
5 / 4
x
2 / 3
10 / 12
=
10 / 12

4. परिमेय संख्याओ का भाग :-

परिमेय संख्याओ को किसी भी क्रम में भाग नही किया जा सकता है अर्थात् परिमेय संख्याओ के लिए भाग संक्रिया क्रम विनिमेय नहीं है
अत: किन्ही दो परिमेय संख्याओ a तथा b के लिए
a ÷ b ≠ b ÷ a

उदाहरण के तौर पर :-
-5 / 4
÷
3 / 7
3 / 7
÷ [
-5 / 4
]
-5 / 4
x
7 / 3
3 / 7
x [
4 / -5
]
-35 / 12
12 / -35

(B) परिमेय संख्याओ के लिए साहचर्य नियम का सत्यापन :-

1. योग :-

परिमेय संख्याएँ योग के लिए साहचर्य है अर्थात् किन्ही तीन परिमेय संख्याओ a , b तथा c के लिए -
a + (b+c) = (a+b) + c

उदाहरण के तौर पर :-
-2 / 3
+ [
3 / 5
+ (
-5 / 6
) ] = [
-2 / 3
+
3 / 5
] + [
-5 / 6
]
-2 / 3
+ (
-7 / 30
) =
-1 / 15
+ (
-5 / 6
)
-9 / 10
=
-9 / 10

2. व्यकलन :-

परिमेय संख्याओ के लिए व्यकलन साहचर्य नही है अर्थात् किन्ही तीन परिमेय संख्याओ a , b तथा c के लिए -
a - (b-c) ≠ (a-b) - c

उदाहरण के तौर पर :-
-2 / 3
- [
-4 / 5
-
-1 / 2
][
2 / 3
- (
-4 / 5
) ] -
1 / 2
-2 / 3
- [
-8 - 5 / 10
][
10 + 12 / 15
] -
1 / 2
-2 / 3
-
-13 / 10
22 / 15
-
1 / 2
-20 + 39 / 30
44 - 15 / 30
19 / 30
29 / 30

3. गुणन :-

परिमेय संख्याओ के लिए गुणन साहचर्य है अर्थात् किन्ही तीन परिमेय संख्याओ a , b तथा c के लिए -
a x ( b x c) = (a x b) x c

उदाहरण के तौर पर :-
-7 / 3
x [
5 / 4
x
2 / 9
] = [
-7 / 3
x
5 / 4
] x
2 / 9
-7 / 3
x
10 / 36
=
-35 / 12
x
2 / 9
-70 / 108
=
-70 / 108

4. भाग :-

परिमेय संख्याओ के लिए भाग साहचर्य नही है अर्थात् किन्ही तीन परिमेय संख्याओ a , b तथा c के लिए -
a ÷ (b ÷ c) ≠ (a ÷ b) ÷ c

उदाहरण के तौर पर :-
1 / 2
÷ [
-1 / 3
÷
2 / 5
][
1 / 2
÷ (
-1 / 3
) ] ÷
2 / 5
1 / 2
÷ [
-1 / 3
x
5 / 2
][
1 / 2
x
3 / -1
] ÷
2 / 5
1 / 2
÷
-5 / 6
3 / -2
÷
2 / 5
1 / 2
x
6 / -5
3 / -2
x
5 / 2
6 / -10
15 / -4

(C) परिमेय संख्याओ के लिए गुणक की योग पर वितरकता :-

किसी तीन परिमेय संख्याओ a , b तथा c के लिए
(1) a ( b + c ) = ab + ac
(2) a ( b - c ) = ab - ac

(1) उदाहरण के तौर पर :-
2 / 5
[
1 / 2
+
1 / 4
] =
2 / 5
x
1 / 2
+
2 / 5
x
1 / 4
1 / 5
+
1 / 10
=
1 / 5
+
1 / 10
2 + 1 / 10
=
2 + 1 / 10
3 / 10
=
3 / 10
(2) उदाहरण के तौर पर :-
2 / 5
[
1 / 2
-
1 / 4
] =
2 / 5
x
1 / 2
-
2 / 5
x
1 / 4
1 / 5
-
2 / 20
=
1 / 5
-
2 / 20
4 - 2 / 20
=
4 - 2 / 20
2 / 10
=
2 / 10

परिमेय संख्याओ के योग में शून्य की भूमिका ( शून्य तत्समक )

किसी परिमेय संख्या a के लिए
a + 0 = a तथा 0 + a = a

उदाहरण के तौर पर :-
-2 / 5
+ 0 =
-2 / 5
तथा 0 +
-2 / 5
=
-2 / 5

अत: हम कह सकते है कि परिमेय संख्याओ के लिए शून्य तत्समक कहलाता है

परिमेय संख्याओ में 1 की भूमिका ( गुणात्मक तत्समक ) :-

किसी परिमेय संख्या a के लिए
a x 1 = a तथा 1 x a = a

उदाहरण के तौर पर :-
2 / 5
x 1 =
2 / 5
तथा 1 x
2 / 5
=
2 / 5

अत: हम कह सकते है कि 1, परिमेय संख्याओ के लिए एक गुणात्मक तत्समक कहलाता है

परिमेय संख्याओ के लिए योज्य प्रतिलोम :-

किसी परिमेय संख्या के लिए , उसी परिमेय संख्या के विपरीत चिन्ह वाली संख्या को उस परिमेय संख्या का योज्य प्रतिलोम कहते है
किसी परिमेय संख्या a/b के लिए -

a / b
+
-a / b
= 0 ......... (1)
या
-a / b
+
a / b
= 0

अत: हम कह सकते है कि प्रथम समीकरण में

a / b
का योज्य प्रतिलोम =
-a / b

द्वितीय समीकरण में

-a / b
का योज्य प्रतिलोम =
a / b

परिमेय संख्याओ के लिए गुणात्मक प्रतिलोम :-

किसी परिमेय संख्या का व्युत्क्रम ( उल्टा ) ही उसका गुणात्मक प्रतिलोम कहलाता है

अर्थात् किसी परिमेय संख्या
a / b
के लिए
a / b
x
b / a
= 1
उदाहरण के तौर पर -
8 / 21
x
21 / 8
= 1
अर्थात्
8 / 21
का गुणात्मक प्रतिलोम =
21 / 8

दो परिमेय संख्याओ के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना :-

यह हम मुख्यत: दो विधियों द्वारा ज्ञात कर सकते है :-

प्रथम विधि :- इस विधि को हम एक उदाहरण की सहायता से समझते है

3 / 4
और
3 / 2
के मध्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना

इस विधि में सर्वप्रथम हम दोनों भिन्नों के हर के मान को बराबर करते है

तब
3 / 4
x
1 / 1
=
3 / 4
;
3 / 2
x
2 / 2
=
6 / 4
तब
3 / 4
और
3 / 2
के मध्य परिमेय संख्याएँ -
4 / 4
,
5 / 4

द्वितीय विधि :-

-5 / 6
और
5 / 8

पहली परिमेय संख्या :-
सर्वप्रथम हम दोनों संख्याओ का योग ज्ञात करते है

-5 / 6
+
5 / 8
=
-40 + 30 / 48
=
-10 / 48

अब इस योग को 2 से भाजित करते है

अर्थात्
-10 / 48
÷ 2 =
-10 / 48
x
1 / 2
=
-5 / 48
तब
-5 / 6
<
-5 / 48
<
5 / 8

दूसरी परिमेय संख्या :-
अब हम इनमे से किन्ही दो क्रमागत परिमेय संख्याओ का चयन करते है

-5 / 6
और
-5 / 48
-5 / 6
+
-5 / 48
=
-40 - 5 / 48
=
-45 / 48
=
-15 / 16

अब इस योग को 2 से भाजित करते है

अर्थात्
-15 / 16
÷ 2 =
-15 / 16
x
1 / 2
=
-15 / 32
तब
-5 / 6
<
-15 / 32
<
-5 / 48
<
5 / 8
Question :-
1 / 4
और
1 / 2
के मध्य एक परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए ?
सर्वप्रथम हम दोनों संख्याओ का योग ज्ञात करेंगे -
1 / 4
+
1 / 2
=
1 + 2 / 4
=
3 / 4
अब इस योग को 2 से भाग देने पर
3 / 4
÷ 2 =
3 / 4
x
1 / 2
=
3 / 8
अत:
1 / 4
और
1 / 2
के मध्य
3 / 8
एक परिमेय संख्या है

परिमेय संख्याओ में बड़ा व छोटा ज्ञात करना :-

ज्ञात कीजिए कि
1 / 2
तथा
1 / 4
में कौन बड़ा है

हल :- बड़ी परिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए हम सर्वप्रथम हरों के मान को बराबर करते है

जैसे :-
1 / 2
x
2 / 2
=
2 / 4
;
1 / 4
x
1 / 1
=
1 / 4
अब दोनों परिमेय संख्याओ के अंशो में
2 / 4
का अंश 2 बड़ा है इसलिए
1 / 2
परिमेय संख्या ,
1 / 4
से बड़ी है
1 / 2
>
1 / 4

परिमेय संख्याओ का संख्या रेखा पर निरूपण :-

परिमेय संख्याओ का संख्या रेखा पर निरूपण को हम दो उदाहरण की सहायता से समझते है -

(1)
7 / 4
को संख्या रेखा पर निरुपित कीजिए ?
हल :-
7 / 4
के लिए हम संख्या रेखा पर 0 के दायीं और 7 चिन्ह लगाएँगे जिनमे प्रत्येक के बीच की दुरी
1 / 4
होगी | 0 से प्रारम्भ करेंगे और 7 वां चिन्ह
7 / 4
होगा
 परिमेय संख्याओ का संख्या रेखा पर निरूपण
बिंदु
7 / 4
को दर्शाता है
(2) बिन्दुओ
-2 / 11
,
-5 / 11
,
-9 / 11
को संख्या रेखा पर निरुपित कीजिए ?
हल :-
-2 / 11
,
-5 / 11
,
-9 / 11
को संख्या रेखा पर दर्शाने के लिए शून्य पर O दर्शाएँगे | अब P बिंदु संख्या रेखा पर -1 दर्शाता है
परिमेय संख्याओ का संख्या रेखा पर निरूपण
OP खंड को 11 समान भागों में विभाजित करेंगे | माना A,B,C,D,E,F,G,H,I,J समान भागों के बिंदु है जो इस प्रकार है कि OA = AB = BC = .... = JP रचना द्वारा OB,OP का
-2 / 11
वां भाग है अत: B,
-2 / 11
को दर्शाता है OE, OP का
-5 / 11
वां भाग है अत: E,
-5 / 11
को दर्शाता है और OI, OP का
-9 / 11
वां भाग है अत: I,
-9 / 11
को दर्शाता है |

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