क्रिया की परिभाषा, भेद एवं उनके उदाहरण

 क्रिया की परिभाषा, भेद  एवं उनके उदाहरण

( kriya ki paribhasha bhed evm unke udaharan ka adhdhyan ) ✹ क्रिया की परिभाषा, भेद एवं उनके उदाहरण का अध्धयन :-

क्रिया की परिभाषा :-

जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं
उदाहरण :- : खाना , पीना , जाना , पढ़ना , लिखना आदि ।
क्रिया विकारी शब्द है इसके रूप लिंग , वचन और पुरुष के अनुसार बदलते हैं ।
क्रिया के मूल रूप धातु कहे जाते हैं । क्रिया का ज्ञान मूल धातु में ना जोड़कर कराया जाता है ।
उदाहरण :-
देख + ना = देखना
खा + ना = खाना
कर + ना = करना आदि ।

क्रिया के भेद

1. कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं :-

1. सकर्मक क्रिया
2. अकर्मक क्रिया

1. सकर्मक क्रिया :-

वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का फल जब कर्ता के अतिरिक्त कर्म पर पड़े तो सकर्मक क्रिया होती है ।
उदाहरण :- राम पुस्तक पढ़ता है ।
सीता फूल तोड़ती है ।
यहां पढ़ना क्रिया का फल पुस्तक ( कर्म ) पर पड़ रहा है तथा तोड़ना क्रिया का फल फूल(कर्म) पर पड़ रहा है ।
अतः ये क्रियाएं सकर्मक है ।


2. अकर्मक क्रिया :-

जब क्रिया का फल कर्ता पर पड़ता है वहां अकर्मक क्रिया होती है,
उदाहरण :- राम हंसता है ।
सीता रोती है ।
यहां "हंसना" और "रोना" क्रियाओं का फल उनके कर्ताओ ( राम , सीता ) पर पड़ रहा है । इसलिए यहां अकर्मक क्रिया है ।




2. व्युत्पत्ति के अनुसार क्रियाओं के दो भेद होते हैं :-

1. मूल क्रिया
2. यौगिक क्रिया

1. मूल क्रिया :-

मूल क्रिया वे धातु है , जो किसी दूसरे शब्द से न बने हो ,
उदाहरण :- खाना , करना , चलना , बैठना आदि ।


2. यौगिक क्रिया :-

जो क्रिया या धातु किन्हीं अन्य शब्दों के योग से बनती है उन्हें यौगिक क्रिया कहते हैं ।
उदाहरण :- "चलना" से "चलाना" , "खाना" से "खिलाना" , "पढ़ना और राह" से "पढ़ता रहा" , "जा और गिरा" से "जा गिरा" आदि ।


यौगिक क्रियाओं के निम्नलिखित भेद है -


(a) संयुक्त क्रिया :-

जब दो या दो से अधिक क्रियाएं मिलकर किसी पूर्ण क्रिया को बनाती है तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं । संयुक्त क्रिया में एक मुख्य तथा एक गौण क्रिया का योग रहता है ।
उदाहरण :- उसकी बात सुन लो । काम करते जाओ ।
यहां "सुन" और "लो" दो क्रियाओं के मेल से "सुन लो" क्रिया बनी है ।
"करते" और "जाओ" क्रियाओं के मेल से "करते जाओ" क्रिया बनी है अत: ये संयुक्त क्रियाएं है इसी प्रकार
पानी बरसने लगा ।
उसे जाने दो ।
आगे बढ़ते चलो ।
हम पढ़ना चाहते हैं ।


(b) नामधातु क्रिया :-

जो क्रियाएं संज्ञा , सर्वनाम या विशेषण शब्दों से बनती है , "नामधातु" क्रियाएं कहलाती है ।
उदाहरण :- गर्म से गरमाना , शर्म से शरमाना , लाज से लजाना , लाठी से लठियाना आदि ।
उदाहरण :- राम शरमाता है ।
सीता बहुत बतियाती है ।
धूप में बैठकर बदन गरमा लो आदि ।


नामधातु क्रिया के कुछ उदाहरण

शब्द नामधातु क्रिया
गर्म गरमाना
लाज लजाना
अंगड़ाई अंगड़ाना
हिनहिना हिनहिनाना
बड़बड़ बड़बड़ाना
मोटा मोटाना मोटियाना
थर थर थरथराना
नरम नरमाना
हाथ हथियाना
बात बतियाना
रंग रंगना
लाठी लठियाना
गांठ गांठना
लात लतियाना

(c) प्रेरणार्थक क्रिया :-

जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से करवाये तब वह क्रिया "प्रेरणार्थक क्रिया" कहलाती है ,
उदाहरण :- लिखवाना , पढ़वाना , बुलवाना , दिलवाना आदि ।
उदाहरण :- केशव ने मोहन से पत्र लिखवाया ।
राम ने करीम से श्याम को पुस्तक दिलवायी ।
गोपाल अपने पत्र को मोहन से पढ़वाता है ।


प्रेरणार्थक क्रिया के कुछ उदाहरण :-

सामान्य क्रिया प्रेरणार्थक क्रिया
लिखना लिखवाना
काटना कटवाना
पढ़ना पढ़वाना
भेजना भिजवाना
उठाना उठवाना
सिलना सिलवाना
तोड़ना तुड़वाना
मिलना मिलवाना
करना करवाना
जोड़ना जुड़वाना
देना दिलवाना
रखना रखवाना
मांगना मंगवाना
बनाना बनवाना
खींचना खिंचवाना
कहना कहलवाना

(d) पूर्वकालिक क्रिया :-

वाक्य में एक क्रिया समाप्त हो जाने के बाद दूसरी क्रिया होती है , तब समाप्त होने वाली पहली क्रिया "पूर्वकालिक क्रिया" कहलाती है
उदाहरण :- खाकर , खेलकर , पढ़कर आदि ।
उदाहरण :- वह खाना खाकर सो गया ।
वह पढ़कर चला गया ।
यहां खाकर और पढ़कर पूर्वकालिक क्रियाएं है क्रिया का पूर्वकालिक रूप बनाते समय मूल धातु के साथ कर या करके जोड़ दिया जाता है ।
उदाहरण :- खाकर , जाकर , मारकर , भागकर , चलकर आदि ।



क्रिया के विकारक तत्व :-

क्रियाओं को जब वाक्यो में प्रयुक्त किया जाता है , तो लिंग , वचन , पुरुष , वाच्य , प्रकार और प्रयोग के कारण उनमें अंतर आ जाता है ,
उदाहरण :-
लिंग के आधार पर मैं पढ़ता हूं । सीता जाती है ।
पुरुष के आधार पर मैं पढ़ता हूं । तुम पढ़ते हो । वह पढता है ।
वचन के आधार पर वह पढ़ता है । वे पढ़ते हैं ।
वाच्य के आधार पर मैं पढ़ता हूं । मुझसे पढ़ा जाता है ।
काल के आधार पर वह पढ़ता है । वह पढ़ेगा । उसने पढ़ा ।
प्रकार के आधार पर तू पढ़ता है । तुझे पढ़ना चाहिए ।
प्रयोग के आधार पर मैं पढ़ता हूं । मैंने पढ़ा ।


लिंग :-

वाक्य में कर्ता के लिंग के अनुसार क्रिया का प्रयोग होता है यदि कर्ता पुल्लिंग है तो क्रिया भी पुल्लिंग के रूप में प्रयुक्त होगी और स्त्रीलिंग होने पर क्रिया भी स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होगी ,
उदाहरण :-
राम पढता है ।
सीता पढती है ।


पुरुष :-

सर्वनाम पर विचार करते समय हम देख चुके हैं कि पुरुष 3 होते हैं । उत्तम पुरुष ( मैं , हम ) , मध्यम पुरुष ( तू , तुम ) तथा अन्य पुरुष ( वह , वे ) ।
इन तीनों पुरुषों के आधार पर क्रिया के रूपो में भी परिवर्तन होता है ।
उत्तम पुरुष :- मैं पढ़ता हूं । हम पढ़ते हैं ।
मध्यम पुरुष :- तू पढ़ता हैं । तुम पढ़ते हो ।
अन्य पुरुष :- वह पढता है । वह पढ़ते हैं ।


वचन :-

क्रिया के 2 वचन होते हैं :-
1. एकवचन
2. बहुवचन
क्रिया का वचन कर्ता के अनुसार प्रयुक्त होता है ,
उदाहरण :- घोड़ा दौड़ता है |
घोड़े दौड़ते हैं |
कभी-कभी क्रिया बहुवचन में प्रयुक्त होती है , जबकि कर्ता एकवचन का ही रहता है ऐसी स्थिति में क्रिया के वचन के आधार पर कर्ता का एकवचन होना या बहुवचन होना निश्चित किया जाता है ,
उदाहरण :-
हाथी दौड़ता है | बंदर खाता है |
हाथी दौड़ते है | बंदर खाते हैं |


क्रिया के प्रयोग :-

वाक्य में क्रिया के पुरुष , लिंग , वचन कभी तो कर्ता के अनुसार होते हैं कभी कर्म के अनुसार और कभी इन दोनों में से किसी के अनुसार नहीं होते | इस आधार पर क्रिया का तीन प्रकार से प्रयोग होता है -


1. कर्त्तरी प्रयोग :-

जब क्रिया के पुरुष , लिंग , वचन , कर्ता के अनुसार होते हैं , तो क्रिया के उस प्रयोग को कर्तरी प्रयोग करते हैं उदाहरण :- राम पत्र लिखता है | सीता फूल तोड़ती है |


2. कर्मणि प्रयोग :-

जब क्रिया के पुरुष , लिंग , वचन , कर्म के अनुसार होते है तो क्रिया के उस प्रयोग को कर्मणि प्रयोग कहते हैं उदाहरण :- राम ने पुस्तक पढ़ी | सीता ने पत्र लिखा |


3. भावे प्रयोग :-

जब क्रिया के पुरुष , लिंग , वचन कर्ता या कर्म के अनुसार नहीं होते हैं तथा क्रिया सदैव अन्य पुरुष , पुल्लिंग एवं एकवचन में होती है | तो क्रिया के इस प्रयोग को भावे प्रयोग कहते है ,
उदाहरण :- राम से पढ़ा नहीं जाता | सीता से लिखा नहीं जाता |

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विशेषण की परिभाषा, भेद एवं उनके उदाहरण
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