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संघ की विधायिका ( अनुच्छेद - 79-123 ) | PDF Download |

संघ की विधायिका ( अनुच्छेद - 79-123 )

अनुच्छेद - 79 :-

अनुच्छेद के तहत भारत संघ के लिए एक संसद होगी जो भारत के राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनी होगी ।


अनुच्छेद - 80 :-

राज्यसभा (उच्च सदन) की संरचना इसमें अधिकतम सदस्यों की संख्या 200 हो सकती है जिसमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक कार्य के आधार पर मनोनीत करता है ।
वर्तमान में राज्य सभा में सदस्यों की संख्या 245 हैं ।



अनुच्छेद - 80(3) :-

विभिन्न राज्यों में राज्यसभा के सदस्यो का आवंटन उस राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है ।


अनुच्छेद - 81 :-

लोकसभा ( निम्न सदन ) की संरचना लोकसभा में अधिकतम सदस्यों की संख्या 552 होती है जिसमें से दो एंग्लो भारतीय राष्ट्रपति मनोनीत करता है वर्तमान में लोकसभा में सदस्यों की संख्या 545 है अधिकतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या 550 होती है जिसमें से 530 राज्यों से तथा 20 केंद्र शासित प्रदेशो से निर्वाचित होते हैं ।



अनुच्छेद - 83 :-

संसद का कार्यकाल ।
लोकसभा का कार्यकाल नई सरकार के प्रथम सत्र से 5 वर्ष तक का होता है आपातकाल की स्थिति में इसे 1 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है ।



अनुच्छेद - 84 :-

सदन के सदस्यों की योग्यताए
भारत का नागरिक हो
वह किसी भी लाभ के पद पर ना हो
वह पागल या दिवालिया ना हो
लोकसभा का सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष तथा राज्यसभा का सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होती है ।


संसद का स्थगन , सत्रावसान और विघटन :-

संसद का स्थगन :-

यह लोकसभा स्पीकर या सदन का अध्यक्ष करता है ।


संसद का सत्रावसान :-

सदन का सत्र समाप्त होने की प्रक्रिया ही संसद का सत्रावसान कहलाती है यह राष्ट्रपति करता है ।


संसद का विघटन :-

इसका अर्थ " कार्यकाल का पूरा होना" यह भी राष्ट्रपति के द्वारा ही किया जाता है ।



अनुच्छेद - 89 :-

संसद के अधिकारी ।
राज्यसभा के लिए एक सभापति एवं एक उपसभापति का प्रावधान किया गया हैं ।
भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का पदेन सभापति होता है परंतु यह राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है ।
उपराष्ट्रपति को सदन में मत देने का अधिकार नहीं है किंतु मत विभाजन की स्थिति में बराबर मत पड़ने पर यह निर्णायक मत दे सकता है ।
राज्यसभा के सदस्य अपने में से ही एक उपसभापति का चयन करते हैं ।
सभापति की अनुपस्थिति में उसका कार्यभार उपसभापति संभालता है ।



अनुच्छेद - 90 :-

उपसभापति को 14 दिन का नोटिस देकर सभी राज्यसभा सदस्यों द्वारा पद से हटाया जा सकता है ।


अनुच्छेद - 93 :-

लोकसभा के सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चयन करेंगे ।


अनुच्छेद - 94 :-

अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों अपने त्यागपत्र एक- दूसरे को सौंपेंगे । लोकसभा के अध्यक्ष को को भी 14 दिन का नोटिस देकर उसे लोकसभा से निष्कासित किया जा सकता है ।



अनुच्छेद - 95 :-

अध्यक्ष की अनुपस्थिति में , उपाध्यक्ष उसका कार्यभार संभालेगा ।


अनुच्छेद - 100 :-

संसद की गणपूर्ति । संसद में सत्र शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति को ही संसद की गणपूर्ति कहा जाता है अर्थात लोकसभा के 55 तथा राज्यसभा के 25 सदस्य उपस्थित होना अनिवार्य है अन्यथा लोकसभा के स्पीकर द्वारा सदन का स्थगन किया जा सकता है ।



अनुच्छेद 101 :-

संसद के सदस्यों की योग्यताएं
यदि उसकी नागरिकता छीन ली जाए तो वह संसद के सदस्य के लिए अयोग्य हो जाएगा ।
यदि वह किसी लाभ के पद को ग्रहण कर ले ।
यदि कोई सांसद संसद में होने वाले सत्र से लगातार 60 दिन तक अनुपस्थित रहता है तो वह संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएगा ।



अनुच्छेद 102 :-

एक अयोग्य सांसद की सदस्यता निर्वाचन आयोग की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा रद्द की जाती है ।



अनुच्छेद 103 :-

यदि निलंबित सांसद सत्र में आएगा तो उससे प्रतिदिन ₹500 जुर्माना वसूल किया जाएगा ।


विधायी प्रक्रिया :-

साधारण विधेयक
धन विधेयक

अनुच्छेद 107(1) :-

साधारण विधेयक की परिभाषा
वह विधेयक जो धन विधेयक या संशोधन विधेयक ना हो उसे ही साधारण विधेयक कहते हैं ।
इसे संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है ।


अनुच्छेद 110 :-

धन विधेयक की परिभाषा ।



धन विधेयक एवं साधारण विधेयक में अंतर :-

साधारण विधेयक धन विधेयक
यह किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है यह केवल लोकसभा में ही पेश किया जाता है
इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति से अनुमति नहीं ली जाती है इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य है
इस विधेयक पर लोकसभा एवं राज्यसभा को समान शक्ति प्राप्त है इस पर संपूर्ण शक्ति लोकसभा की होती है , राज्यसभा इसे केवल 14 दिन तक रोक सकती है
इस पर संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान होता है इस पर संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं होता है
इसे राष्ट्रपति एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है लेकिन इस पर राष्ट्रपति स्वीकृति देने के लिए बाध्य होता है

अनुच्छेद 112 :-

संघ का वार्षिक वित्तीय विवरण ( संघीय बजट ) ।
भारत में कुल 3 निधियां हैं -


अनुच्छेद 266 :-

भारत की संचित निधि इससे धन निकालने का अधिकार केवल संसद को है ।


अनुच्छेद 267 :-

आकस्मिक निधि
इससे धन निकालने की अनुमति केवल राष्ट्रपति दे सकता है ।
लोक लेखा निधि :- इससे धन निकालने का अधिकार भारत सरकार का होता है ।


अनुच्छेद 121 :-

संसद में भाषा का प्रयोग ।


अनुच्छेद 122 :-

संसद के कार्यों में न्यायपालिका का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा ।

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