संविधान का भाग-3 [ मौलिक अधिकार ( अनुच्छेद 12 से 35 ) ] | PDF Download |

संविधान का भाग-3 [ मौलिक अधिकार ( अनुच्छेद 12 से 35 ) ]

संविधान का भाग-3 मौलिक अधिकार ( अनुच्छेद 12 से 35 ) ।

मौलिक अधिकारों का प्रावधान USA से लिया गया है । संविधान के भाग 3 को संविधान का मैग्ना कार्टा कहा जाता है ।

मैग्ना कार्टा :-

1215 ईस्वी में ब्रिटेन के महाराजा जॉन के द्वारा वहां के नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए । इन्हीं लिखित अधिकारों को मैग्ना कार्टा कहा जाता है । इसी लिखित पत्र को मौलिक अधिकारों का जनक कहा जाता है ।

मौलिक अधिकारों का उद्देश्य :-

a. व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास ।
b. सरकार की शक्तियों को परीसीमित करना ।
c. समानता सुनिश्चित करना ।
d. अभिव्यक्ति एवं रिवाजो को मानने की स्वतन्त्रता सुनिश्चित करना ।
e. विधि अनुसार सरकार का गठन करना ।

संविधान का भाग-3 से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु :-

1. भारत में सबसे पहले मौलिक अधिकारों की मांग एनी बेसेंट ने केवल मौखिक रूप से की थी ।
2. मौलिक अधिकारों की प्रथम लिखित मांग 1928 में मोतीलाल नेहरू ने नेहरू रिपोर्ट के द्वारा की । इसलिए नेहरू रिपोर्ट को भारतीय संविधान का ब्लूप्रिंट कहा जाता है ।
3. 1931 में कांग्रेस के करांची अधिवेशन द्वारा कांग्रेस ने सर्वप्रथम मौलिक अधिकारों की मांग की । इसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी ।
4. 1931 में ही गांधीजी के द्वारा मौलिक अधिकारों की मांग को लंदन के द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में दोहराया गया था ।
5. पंडित जवाहरलाल नेहरु के द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया जिसे तेज बहादुर सप्रू कमेठी कहा गया जिसके अध्यक्ष तेज बहादुर सप्रू थे । इस कमेठी की रिपोर्ट ने नेहरू रिपोर्ट के मौलिक अधिकारों को दो भागों में बांट दिया ।
( a ) वो अधिकार जिनसे लोगों को वंचित नहीं किया जा सकता है तथा इसके खिलाफ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है इन्हीं को भारतीय संविधान के भाग 3 में जोड़ा गया तथा इन्हीं को मौलिक अधिकार कहा गया जिनका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 तक किया गया है इन्हें USA से लिया गया है ।
( b ) वो अधिकार जिससे लोगों को वंचित नहीं किया जा सकता तथा इसके खिलाफ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकते । इन्हें भाग 4 ( D.P.S.P ) में जोड़ दिया गया जिनका प्रावधान अनुच्छेद 36-51तक किया गया है । इन्हें आयरलैंड से लिया गया है ।
सभी व्यक्तियों ( विदेशी भी ) को मिलने वाले मौलिक अधिकार :- अनुच्छेद - 14 , 20, 21, 21(A), 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28 ।
केवल भारतीयों को मिलने वाले मौलिक अधिकार :- अनुच्छेद - 15,16,19,29,30 ।
मौलिक अधिकार :- वे अधिकार जिनके हनन पर सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं ।
वैधानिक अधिकार :- वें अधिकार जिनके हनन पर पूरे के पूरे न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है ।

अनुच्छेद 12 :- राज्य की परिभाषा ।

राज्य में शामिल है -
1. भारत सरकार और संसद ( कार्यपालिका और विधायिका ) ।
2. राज्य की सरकार तथा उस राज्य का विधानमंडल ( कार्यपालिका और विधायिका ) ।
3. ग्राम पंचायत, नगरपालिकाएं , नगर निगम और अन्य निगम बोर्ड ।
4 वे सभी व्यक्ति एवं संस्थाएं जो संविधान के तहत स्थापित किए गए हैं ।

अनुच्छेद 13 :- मौलिक अधिकारों से असंगति विधियों का शून्य होना या निरस्त होना ।

1. यदि संसद द्वारा किसी ऐसी विधि का निर्माण किया जाता है जिससे मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो उस विधि को न्यायालय निरस्त कर सकता है ।
2. संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत उच्चतम न्यायालय तथा अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को अधिकार है कि वे मौलिक अधिकारों से असंगत बनी विधियों को निरस्त कर सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के द्वारा की गई यही न्यायिक प्रक्रिया को न्यायिक पुनरावलोकन का सिद्धांत कहते हैं । इस सिद्धांत को USA से लिया गया है ।
3. 1971 के 24 वें संविधान संशोधन के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अनुच्छेद 13 की कोई भी बात अनुच्छेद 368 पर लागू नहीं होगी ।
इस संविधान से संबंधित मामले -
A. गोरखनाथ v/s पंजाब राज्य
B. केशवानंद भारती v/s केरल राज्य :- इसमें सुप्रीम कोर्ट के द्वारा संविधान के मूल ढांचे की बात की गई थी तथा इसमें सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह फैसला किया गया था कि संविधान संशोधनों को तभी न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है जब उस संविधान संशोधन से मौलिक अधिकारों या उसके मूलभूत ढांचे का हनन होता हो ।

मौलिक अधिकार

A. समानता का अधिकार ( अनुच्छेद 14 से 18 )

अनुच्छेद 14 :- विधि के तहत समानता ।

भारत का प्रत्येक व्यक्ति कानून की नजरों में एक समान माना जाएगा ।
अपवाद :-
a. अनुच्छेद 361 के तहत भारत का राष्ट्रपति तथा राज्यों के राज्यपाल इस अनुच्छेद-14 से अलग रखे गए हैं ।
b. लोगों के बीच उनकी प्रकृति , योग्यता , परिस्थिति, भौगोलिक स्थिति, शिक्षा, आयु, संपत्ति के आधार पर अगर न्यायालय चाहे तो उनके बीच में विभेद कर सकता है ।
c. सांसद ( M.P ) एवं विधान मंडल के सदस्य ( M.L.A ) को भी इस अनुच्छेद-14 से अलग रखा गया है।

अनुच्छेद-15 :- धर्म, मूलवंश ,जाति , लिंग एवं जन्म स्थान के आधार पर विभेद पर प्रतिबंध ।

यह अधिकार केवल भारतीय नागरिक को दिया गया है ।

अपवाद :-

अनुच्छेद-15(3) :- राज्य, महिलाओं एवं बालकों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है ।

अनुच्छेद 15(4) :- राज्य चाहे तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से पिछड़े हुए व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है । इसी अनुच्छेद में आरक्षण का उल्लेख है ।

अनुच्छेद 15(5) :- राज्य चाहे तो वह सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पर उन्हें आरक्षण दे सकता है ।

अनुच्छेद 16 :- सभी नागरिकों को लोक नियोजन में अवसर की समानता ।

अपवाद :-

अनुच्छेद 16(4) :- पदों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए आरक्षण ।

अनुच्छेद-16(4) :- पदों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति को आरक्षण ।

2000 के 82 वें संविधान संशोधन के तहत यह प्रावधान किया गया है कि राज्य चाहे तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति के वर्गों के लिए न्यूनतम उत्तीनांक को कम कर सकती है । यह प्रावधान अनुच्छेद-335 के तहत किया गया है ।

अनुच्छेद-17 :- असपश्यता का अंत ।

अनुच्छेद-18 :- उपाधियों का अंत ।

अनुच्छेद 18(1) :- राज्य सेवा या शिक्षा संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा ।

अनुच्छेद 18(2) :- भारत का नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि नहीं लेगा ।

अनुच्छेद 18(3) :- लाभ अथवा विश्वास का पद धारण करने वाला कोई भी नागरिक अथवा विदेशी भी राष्ट्रपति की अनुमति के बिना कोई उपाधि ग्रहण नहीं करेगा ।

अनुच्छेद 18(4) :- भारत रत्न आदि नागरिक सम्मान दिए जा सकते हैं लेकिन इनका उपयोग नाम के आगे नहीं किया जा सकता ।



स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22 ) :-

अनुच्छेद 19 :- इस अनुच्छेद में हमें 5 स्वतंत्रता प्राप्त है यह केवल भारत के नागरिकों को प्रदान किया गया है ।

अनुच्छेद-19(1) :-

विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ।
झंडा फहराने की स्वतंत्रता ।
प्रेस की स्वतंत्रता ।
सूचना का अधिकार ( वैधानिक अधिकार ) ।
शांत रहने की स्वतंत्रता ।
जानने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद-19(2) :- शांतिपूर्वक एवं निशस्त्र सम्मेलन करने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद 19(3) :- संघ बनाने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद 19(4) :- भारत राज्य क्षेत्र में सर्वत्र विचरण करने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद 19(5) :- भारत राज्य क्षेत्र में कहीं भी निवास करने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद-20 :- अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संदर्भ में संरक्षण ।

अनुच्छेद-20(1) :- कार्योत्तर विधियों पर संरक्षण ।

किसी व्यक्ति को तब तक अपराधी नहीं माना जाएगा जब तक उसने अपराध करने के समय लागू किसी कानून का उल्लंघन न किया हो ।

अनुच्छेद-20(2) :- दोहरे दंड से संरक्षण ।

किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दंड नहीं दिया जा सकता ।

अनुच्छेद 20(3) :- स्वयं के विरुद्ध साक्षी होने के संरक्षण ।

किसी अपराध के लिए अभियुक्त को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता ।

Note :- अनुच्छेद-359 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अगर राष्ट्रपति चाहे तो आपातकालीन स्थिति में व्यक्तियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर सकता है । यह प्रावधान अनुच्छेद-20 , 21 पर लागू नहीं होता है ।

अनुच्छेद-21 :- प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण । इसी में निजता का अधिकार भी जोड़ा गया है ।

अनुच्छेद 21(A) :- 2002 के 86 वें संविधान संशोधन के तहत जोड़ा गया है इसी के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया है ।

अनुच्छेद-22 :- गिरफ्तारी एवं निरोध से संरक्षण ।

अनुच्छेद 22(1) :- किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने पर उसे गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराए बिना अभिरक्षा में नहीं रखा जाएगा ।

अनुच्छेद 22(2) :- गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा ( यात्रा के समय को छोड़कर )

अनुच्छेद 22(3) :- उसे अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और प्रतिरक्षा कराने से वंचित नहीं रखा जाएगा ।



शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23, 24 ) :-

अनुच्छेद-23 :- मानव दुर्व्यवहार एवं बलात श्रम पर प्रतिबंध ।

अनुच्छेद-24 :- बाल श्रम पर प्रतिबंध ।



धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ( अनुच्छेद 25-28 ) :-

अनुच्छेद 25 :- भारत में किसी भी धर्म को मानने एवं उसके रीति-रिवाजों का पालन करने की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद 26 :- धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता ।

अनुच्छेद 27 :- भारत में प्रत्येक धार्मिक आय को कर मुक्त समझा जाएगा ।

अनुच्छेद 28 :- कोई भी शैक्षणिक संस्थान धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं करेगा ।



सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार ( अनुच्छेद-29,30 ) :-

अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण ।

व्यक्ति को अधिकार है कि वह अपनी भाषा, लिपि एवं संस्कृति का पालन, विकास एवं प्रचार कर सकता है ।

अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थानों की स्थापना एवं प्रशासन का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार ।

Note :- अनुच्छेद 31 को मौलिक अधिकारों में शामिल न कर इसे अब वैधानिक अधिकार बना दिया गया है इसलिए अनुच्छेद-31 को संविधान के भाग-3 से हटाकर अनुच्छेद 300(A) में शामिल कर दिया गया है ।



संवैधानिक उपचारों का अधिकार ( अनुच्छेद- 32- 35 ) :-

अनुच्छेद- 32 :- इस भाग द्वारा प्रदत अधिकारों को लागु कराने के लिए उपचार । भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा कहा है इसके तहत उच्चतम न्यायालय को निर्देश, आदेश या रिट जारी करने का अधिकार है ।

रीट पांच प्रकार की होती है -

1. बंदी प्रत्यक्षीकरण :-

इसका शाब्दिक अर्थ 'शरीर को प्राप्त करना' होता है इसके तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को सशरीर न्यायालय में 24 घंटे के भीतर पेश करना होता है ।

2. परमादेश :-

यह किसी भी कर्मचारी, संस्था, विभाग, अधीनस्थ न्यायालय के विरुद्ध जारी की जाने वाली रिट है ।

3. अधिकार पृच्छा :-

यह रेट उस व्यक्ति के विरोध में जारी की जाती है जिसके विषय में यह शिकायत की जाती है कि उसने अवैध रूप से किसी पद को धारण कर रखा है ।

4. प्रतिषेध :-

यह न्यायिक एवं अर्द्धन्यायिक संस्थाओं के विरुद्ध जारी किया जाता है ।

5. उत्प्रेषण :-

यदि अधीनस्थ न्यायालय क्षेत्राधिकार का उल्लंघन कर कोई निर्णय कर चुका है तो उस निर्णय को रद्द करने के लिए रिट जारी की जाती है ।

अनुच्छेद- 33 :- इस भाग द्वारा प्रदत अधिकारों को रूपांतरण करने की संसद की शक्ति ।

अनुच्छेद- 34 :- जब किसी क्षेत्र में सैनिक कानून लागु हो तब इस भाग द्वारा दिये गये अधिकारों पर पाबंधी ।

अनुच्छेद- 35 :- इस भाग के उपबंधो को प्रभावी करने के लिए कानून ।


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