मुगल शासक ( अकबर )

अकबर के प्रमुख कार्य :-

► दास प्रथा उन्मूलन = 1562
► हरमदल से मुक्ति = 1562
► तीर्थकर समाप्त = 1563
► जजिया समाप्त = 1564
► फतेहपुर सीकरी = 1571
► इबादत खाने की स्थापना = 1575
► मजहर की घोषणा = 1579
► दीन-ए-इलाही की स्थापना = 1582
► इलाही संवत की शुरुआत = 1583
► राजधानी लाहौर की स्थान्नातरित = 1585

अकबर के मुख्य बातें :-

► अकबर का बचपन का नाम जलाल था |
► अकबर का राज्याभिषेक 14 फ़रवरी, 1556 ई. को पंजाब के कलानौर नामक स्थान पर हुआ |
► पानीपत की दूसरी लडाई 5 नवम्बर , 1556 ई. को अकबर और हेमू के बीच हुई थी |
► अकबर प्यार से बैरम खा को खानी बाबा कहते थे |
► अकबर ने भगवान दास को अमीर-ऊल-ऊमरा की उपाधि दी |
► जैनाचार्य हरिविजय सूरी को अकबर ने जगतगुरु की उपाधि दी |
► अकबर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतकार तानसेन था |
► अकबर के दरबार का प्रसिद्ध चित्रकार अब्दुल समद था |
► अकबर की देहांत 16 अक्टूबर, 1605 ई. में हुआ इसे आगरा के पास सिकन्दरा में दफनाया गया |

अकबर के नवरत्न :-

अकबर को कलाकारों एवं बुद्धिजीवियो से विशेष प्रेम था। उसके इसी प्रेम के कारण अकबर के दरबार में नौ (9) अति गुणवान दरबारी थे जिन्हें अकबर के नवरत्न के नाम से भी जाना जाता है।
1. अबुल फजल ने अकबर के काल को कलमबद्ध किया था। उसने अकबरनामा की भी रचना की थी। इसने ही आइन-ए-अकबरी भी रचा था।
2. फैजी अबुल फजल का भाई था। वह फारसी में कविता करता था। राजा अकबर ने उसे अपने बेटे के गणित शिक्षक के पद पर नियुक्त किया था।
3. मिंया तानसेन अकबर के दरबार में गायक थे। वह कविता भी लिखा करते थे।
4. राजा बीरबल दरबार के विदूषक और अकबर के सलाहकार थे। ये परम बुद्धिमान कहे जाते हैं। इनके अकबर के संग किस्से आज भी कहे जाते हैं।
5. राजा टोडरमल अकबर के वित्त मंत्री थे। इन्होंने विश्व की प्रथम भूमि लेखा जोखा एवं मापन प्रणाली तैयार की थी।
6. राजा मान सिंह आम्बेर (जयपुर) के कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वह अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे। इनकी बुआ जोधाबाई अकबर की पटरानी थी।
7. अब्दुल रहीम खान-ऐ-खाना एक कवि थे और अकबर के संरक्षक बैरम खान के बेटे थे।
8. फकीर अजिओं-दिन अकबर के सलाहकार थे।
9. मुल्लाह दो पिअज़ा अकबर के सलाहकार थे।

विवाह संबंध :-

► आंबेर के कछवाहा राजपूत राज भारमल ने अकबर के दरबार में अपने राज्य संभालने के कुछ समय बाद ही प्रवेश पाया था। इन्होंने अपनी राजकुमारी हरखा बाई का विवाह अकबर से करवाना स्वीकार किया। विवाहोपरांत मुस्लिम बनी और मरियम-उज़-ज़मानी कहलायी। उसे राजपूत परिवार ने सदा के लिये त्याग दिया और विवाह के बाद वो कभी आमेर वापस नहीं गयी । उसे विवाह के बाद आगरा या दिल्ली में कोई महत्त्वपूर्ण स्थान भी नहीं मिला था, बल्कि भरतपुर जिले का एक छोटा सा गाँव मिला था। उसकी मृत्यु 1823 में हुई थी ।
► कई राजपूत सामन्तों को भी अपने राजाओं का पुत्रियों को मुगलों को विवाह के नाम पर देना अच्छा नहीं लगता था। गढ़ सिवान के राठौर कल्याणदास ने मोटा राजा राव उदयसिंह और जहांगीर को मारने की धमकी भी दी थी, क्योंकि उदयसिंह ने अपनी पुत्री जगत गोसाई का विवाह अकबर के पुत्र जहांगीर से करने का निश्चय किया था।

धर्म :-

► अकबर एक मुसलमान था, पर दूसरे धर्म एवं सम्प्रदायों के लिए भी उसके मन में आदर था। जैसे-जैसे अकबर की आयु बढ़ती गई वैसे-वैसे उसकी धर्म के प्रति रुचि बढ़ने लगी। उसे विशेषकर हिंदू धर्म के प्रति अपने लगाव के लिए जाना जाता हैं। उसने अपने पूर्वजो से विपरीत कई हिंदू राजकुमारियों से शादी की। इसके अलावा अकबर ने अपने राज्य में हिन्दुओ को विभिन्न राजसी पदों पर भी आसीन किया जो कि किसी भी भूतपूर्व मुस्लिम शासक ने नही किया था। वह यह जान गया था कि भारत में लम्बे समय तक राज करने के लिए उसे यहाँ के मूल निवासियों को उचित एवं बराबरी का स्थान देना चाहिये।


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