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विद्युत चुंबकीय तरंगे ( Electromagnetic Waves ) | PDF Download

विद्युत चुंबकीय तरंगे ( Electromagnetic Waves )

विद्युत चुंबकीय तरंगे ( Electromagnetic Waves ) का अध्धयन :-

यांत्रिक तरंगों से भिन्न प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंगे होती है जो निर्वात में भी चल सकती है , उनके संचरण के लिए कोई भौतिक माध्यम आवश्यक नहीं होता है ये प्रकाश की चाल से चलती है , ये तरंगे अनुप्रस्थ प्रकाश की तरंगे हैं ।
विद्युत चुंबकीय तरंगे , आवेशित मूल-कणों जैसे - इलेक्ट्रॉन , प्रोटॉन आदि के मुक्त अवस्था में दोलन करने से उत्पन्न होती है ।


प्रकाश , ऊष्मीय विकिरण , एक्स किरणें , रेडियो-तरंगे आदि इनके विभिन्न रूप है जो इस प्रकार है :

गामा किरणें ( Gamma Rays ) :-

गामा किरणों को इनके अन्वेषक के नाम पर बैकुरल भी कहते हैं । इनका तरंगदैर्घ्य 10 -14 मीटर तक होता है इनकी आवृत्ति बहुत अधिक होने के कारण ये अपने साथ बहुत अधिक ऊर्जा ले जाती है इनकी वेधन क्षमता इतनी अधिक है कि ये 30 सेमी. मोटी लोहे की चादर को भेद कर निकल जाती है ।

एक्स किरणें ( X Rays ) :-

इन किरणों को उनके अन्वेषक के नाम पर रौटजन किरणे भी कहते हैं ये तीव्रगामी इलेक्ट्रॉनों के किसी भारी लक्ष्य वस्तु पर टकराने से उत्पन्न होती है चिकित्सा में इनका उपयोग टूटी हड्डी तथा फेफड़ों के रोगों का पता लगाने में किया जाता है ।

पराबैंगनी विकिरण ( Ultraviolet Rays ) :-

इस विकिरण का पता रिटर ने बताया था इनका तरंगदैर्घ्य 10 -8 मीटर से 4 x 10-7 तक होता है इनका संसूचक प्रकाश-वैद्युत प्रभाव, प्रतिदीप्त पर्दा अथवा फोटोग्राफिक प्लेट द्वारा किया जाता है इनका उपयोग सिंकाई करने , प्रकाश- वैद्युत प्रभाव को उत्पन्न करने , हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने आदि में किया जाता है ।

दृश्य प्रकाश ( Visible Light ) :-

दृश्य प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 4.0 x 10-7 मीटर से 7.8 x 10 -7 मीटर तक होता है । इनके स्त्रोत सूर्य तथा तारों के अतिरिक्त ज्वाला , विद्युत- बल्ब , आर्क लैंप आदि ताप दीप्ति वस्तुएं है । प्रकाश से ही हमें वस्तुएं दिखाई देती है ।

अवरक्त विकिरण ( Infrared Radiation ) :-

इन विकिरणों का पता हरशैल ने लगाया था इनका तरंगदैर्घ्य 7.8 x 10-7 मीटर से 10 3 मीटर तक होता है इनकी प्राप्ति तप्त वस्तुओं तथा सूर्य से होती है । ये जिस वस्तु पर पड़ती है उसका ताप बढ़ जाता है ।

हर्टज तरंगे :-

इनका अन्वेषण वैज्ञानिक हैंनरिक हर्टज ने किया था । सामान्य भाषा में इन्हें बेतार-तरंगे या रेडियो तरंगे भी कहते हैं इनका तरंगदैर्घ्य 103 मीटर से 104 मीटर तक हो सकता है इनकी उत्पत्ति किसी विद्युत चालक में उच्च आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा के प्रभाव से होती है ।
10-3 मीटर से 10 -2 मीटर तरंगदैर्घ्य की तरंगों को सूक्ष्म तरंगे कहते हैं इनका उपयोग टेलीविजन, टेलीफोन आदि के प्रसारण में किया जाता है ।
1 मीटर से 10 4 मीटर की तरंगदैर्घ्य वाली तरंगों को विद्युत चुंबकीय तरंगे या वायरलेस या दीर्घ रेडियो तरंगे कहते है ।



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